Friday, 17 November 2017

मेघदूत सन्देश की महत्ता का यही मुहूर्त्त है
अलकापुरी (अल्मोड़ा) की विरहिणी जाखन देवी
देहरादून से शिवानी आजाद टाइम्स आफ इंडिया ने 12 नवंबर 2017 के अंक में खबर छापी है कि गढ़वाल के गांववासी शौचालयों को ध्वस्त कर रहे हैं। उत्तरकाशी जिले के उडारी गांव वाले अपने घरों में बने हुए शौचालया तुड़वा रहे हैं। गांव उडारी के पचास से ज्यादा परिवारों ने शौचालय तोड़ो अभियान शुरू कर एक सर्वथा नये अभियान की शुरूआत की है। उडारी की आबादी लगभग 335 है। अखबारी खबरें कभी कभी अफवाहों पर भी आधारित होती हैं। शिवानी आजाद फरमा रही हैं कि अंधविश्वास गांव वालों पर हावी है किन्तु वास्तविकता इसके विपरीत है। यक्ष-राक्षसों के अगुआ धनेश कुबेर लंका के राजा थे। सभी यक्ष व राक्षस उनकी वशवर्ती थे। कुबेर विश्रवा के ज्येष्ठ पुत्र, पुलत्स्य ऋषि के पौत्र तथा सृष्टि कर्ता ब्रह्मा के प्रपौत्र थे। दशग्रीव दशानन उनका अनुज था। महाविष्णु ने धनेश कुबेर को पुष्पक विमान दिया था। रावण (रावणो लोक रावणः) दुनियां को रूलाने वाले दशग्रीव रावण ने अपने अग्रज कुबेर को लंका (श्रीलंका, सिंहल) से निष्कासित कर दिया। धनेश कुबेर को हिमालय में अलकापुरी जिसे कुमइयां भाषा में अल्माड़ अंग्रेजी में अल्मोरा तथा हिन्दी में अल्मोड़ा नाम से पुकारा जाता है कुबेर वहां रहने चले गये। उन्होंने अलकापुरी को अपना कार्यक्षेत्र निश्चित कर लिया। कालिदास ने अपनी पत्नी के कथन ‘अस्ति कश्चित् वागविशेषः’ पर तीन महाकाव्य रच डाले जिनमें से एक का नाम ‘मेघदूत’ भी है। मेघदूत की मुख्य पात्र विरहिणी यक्षिणी है जिसे कुमइयां भाषा में जाखन देवी के नाम से पुकारा जाता है। इसी जाखन देवी का अल्मोड़ा कोसी मोटर मार्ग केे दक्षिणी किनारे पर अल्मोड़ा मोटर स्टेशन से लगभग 2 किलोमीटर दूरी पर एक मंदिर भी है। यक्षराज कुबेर ने अपने अति विश्वस्त रहे यक्ष को देश निकाला दे दिया। यक्ष हिमालय से दक्षिण की ओर बढ़ा। वर्तमान छत्तीसगढ़ में एक छोटे पहाड़ का नाम रामगिरि है। यही वह स्थान है जहां से यक्ष ने हिमालय स्थित अपनी विरहिणी यक्षिणी को संदेश भेजा। संदेश ले जाने वाला व्यक्ति मेघदूत कहलाया। रामगिरि में यक्ष ने जो संदेश अपनी विरहिणी जाखन देवी को भेजा वह खरोष्ट्री लिपि में अंकित हैै। कालिदास ने मेघदूत काव्य नागरी लिपि में लिखा है। प्रतीति होती है जब असल घटना घटी तक हिन्द में नागरी लिपि का अस्तित्व नहीं था केवल ब्राह्मी लिपि व खरोष्ट्री लिपि का ही प्रयोग हुआ करता था। 
माननीय प्रधानमंत्री जी आपके दो सांसद सर्व श्री भगत सिंह कोश्यारी तथा अजय टम्टा अल्मोड़ा शहर के उत्पाद हैं। यह हो सकता है कि कभी जाखन देवी के मंदिर में गये हों और जाखन देवी की महिमा उन्हें ज्ञात हो। अल्मोड़ा स्थित जाखन देवी मंदिर के बारे में उनकी मान्यता जानने की तत्काल आवश्यकता है। हो सकता है दोनों ने संस्कृत काव्य मेघदूत को भी पढ़ा हो और उनकी जानकारी में रामगिरि में खरोष्ट्री लिपि में अंकित संदेश के बारे में भी जानते हों इसलिये कृपापूर्वक उन दोनों सांसदों का अभिमत भी जानने की आवश्यकता है। दूसरी ओर मेघदूत महाकाव्य मंत्रिमंडल के प्रत्येक माननीय सदस्य का ज्ञातव्य विषय है। मेघदूत महाकाव्य मूलतः संस्कृत काव्य है अतः आवश्यकता इस बात की भी प्रतीत होती है मेघदूत महाकाव्य का अनुवाद अंग्रेजी सहित हिन्द की सभी संविधानसम्मत भाषाओें में भी उपलब्ध कराया जाये ताकि मुल्क का रह पढ़ा लिखा व्यक्ति अपनी मातृभाषा में मेघदूत के काव्य का आनंद ले सके। प्रधानमंत्री जी कुमांऊँ (पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, अल्मोड़ा तथा नैनीताल का पर्वतीय इलाका जिसे छखाता भी कहा जाता है) नवदुर्गा स्त्रोत है। इस इलाके में ही आदि शंकराचार्य द्वारा विधिवत स्थापना हाटकालिक - गंगोलीहाट का भगवती कालिका का मंदिर हैै जिसे आदि शंकराचार्य ने उतना ही महत्व दिया जितना केदारनाथ के मंदिर व बदरीनाथ के तीर्थ को दिया। उत्तराखंड में आदि शंकर की तीन महत्वपूर्ण कृतियों की - केेदारनाथ का ज्योतिर्लिंग, बदरी धाम तथा गंगोलीहाट में कालिका धाम की स्थापना हैं। श्रीमद्भगवदगीता में वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा - मेरी विभूतियों में स्थावरों में हिमालय है। हिमालय के हर कंकर में शंकर वास करते हैं। शंकर शब्द की जब व्याख्या होती है तो कहा जाता है शंकर करोति जो सदा कल्याण करे वह शंकर है। दूसरी ओर उन्होंने उद्धव गीता में उद्धव से कहा - गहनानाम् हिमालयः इसलिये हिमालय की अनदेखी न करना ही हिमालय का विशेष रूतबा है। 
माननीय प्रधानमंत्री जी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री महाशय को सुझाइये कि यक्ष-राक्षस संबंधी प्रकरण में गहराई से सोचें। यह मालूम करें कि कितने गांव यक्ष व कितने गांव यक्षिणी या जाखिनी शब्दों से जुड़े हैं। हिमालय में जो समाज बसते हैं उनमें देव दानव गंधर्व यक्ष राक्षस किन्नर में कौन कौन समाज कहां कहां किस मात्रा में है। जहां तक देवताओं का सवाल है कश्यप-अदिति क बेटे आदित्य कहलाते हैं। आदित्यों का मूल स्थान हिमालय केे उत्तर में त्रिविष्टप है जिसे आजकल तिब्बत कहते हैं। हिमालय के शेष इलाकों में दानव गंधर्व यक्ष राक्षस किन्नर रहते हैं। किन्नर मूलतः वानर  हैं। जब कभी हिमालय में रहने वाले स्वयं को देव और अपने इलाके को देवभूमि कहते हैं हंसी आती है कि हिमालय के सब लोग वास्तविकता से भाग रहे हैं। भौतिक जरूरत यह है कि हिमालय में जाख, जाखिनीख् गांव कहां कहां कितनी मात्रा में हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर के निकटवर्ती गंगा तट पर जाखिनी नाम का एक गांव है जहां बनारस के भूमिहर राजा विभूति नारायण जी के खानदानी भूमिहर रहते हैं। इस गांव के एक व्यक्ति ब्रह्मदेव प्रसाद इस ब्लागर के साथी रहे हैं। उनके गांव जाखिनी निवासी भी धनेश कुबेर यक्षराज से संबंधित समाज रहे हैं। धनेश कुबेर के गोत्र वाले कहां कहां कितनी मात्रा में थे यह जानने की भी जरूरत है। 
अब अल्मोड़ा पर विचार करें। धनेश कुबेर की अलकापुरी में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री महाशय हरीश रावत व अल्मोड़ा की महिला शक्ति भाजपा व संघ के महिला विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं। उनकी सोच है कि कुमांऊँ की महिला शक्ति भाजपा के विरोध में एकजुट है इसलिये जाखन देवी का माहात्म्य बढ़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी जी निकट भविष्य में जब कभी अल्मोड़ा पहुंचें उन्हें विरहिणी यक्षिणी का शाश्वत मंदिर दिखाया जाये। जाखन देवी के मंदिर को भव्य स्वरूप दिये जाने का मुहूर्त्त आगया है इसलिये विरहिणी यक्षिणी को जो संदेश मेघदूत दे गये उसका हिमालय की स्त्री शक्ति सम्मान मिले। जो संदेशा रामगिरि में खरोष्ट्री लिपि में दर्ज है उसे हर हिन्दुस्तानी भाषा व हिन्दुस्तानी संस्कृति का दूत समझा जाये। उत्तराखंड के मौजूदा प्रधानमंत्री महाशय भी कृपापूर्वक मेघदूत के संदेश का लाभार्जन करते हुए पलायन रोकने पर्वतीय क्षेत्रों में शहरी इलाकों का जाल बिछाने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना के मेघदूत के संदेश से जोड़ कर गढ़वाल के गांवों में शौचालय तोड़ने वाला जो अभियान चल रहा है उसकी गहराई में जाकर जाख देवता वाले प्रसंग में सही सही स्थिति प्रधानमंत्री महोदय के संज्ञान में विशेषतया उत्तराकाशी जिले के संदर्भ में संकल्पित करें। बात अधूरी ही रह जायेगी यदि प्रश्नगत मामने में महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने श्रीलंका-सिंहल से लेकर समूचे हिन्द, हिमालय, तिब्बत सहित ऋषि देश वर्तमान में रसिया नाम से जाने जाने वाले राष्ट्र की अपनी पहुंचत - गंगा से वोल्गा तक के महाकाव्य में भारत रूस की जो भव्य झांकी चित्रित की है उसे दुनियां सही परिप्रेक्ष्य में समझने में समर्थ हो। संकृति विप्रवर महापंडित राहुल सांकृत्यायन शताब्दी वर्ष 2018 में मनाया जाना भी हिन्द की वैश्विक राजनीति की आवश्यकता हैै। इस ब्लागर ने इंडिया टुडे केे यशस्वी संपादक श्री अरूण पुरी का ध्यानाकर्षण करते हुए उनसे अपेक्षा की है कि हिन्द के अंग्रेजी अखबारों ने राहुल सांकृत्यायन की उपलब्धियों की जो भयावह अनदेखी की है उसका परिमार्जन करने का समय आगया है। भारत सरकार को भी वर्ष 2018 महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने हिन्द की विशिष्टता की जो गाथायें अपने जीवन में गायीं भारत सरकार महापंडित राहुल सांकृत्यायन शताब्दी समारोह मनाने का शुभ निश्चय करे और ऋषि देश या रसिया के साथ हिन्द के राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने में अपनी प्रतिभागिता सुनिश्चित करने के बारे में सहृदयातापूर्वक सोचे।
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प्रतिलिपि - 
उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री की सेवा में
टाइम्स आफ इंडिया 12 नवंबर 2017 की पेपर कटिंग सहित प्रेषित। 
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