मोदी आर्थिकी के दूरगामी सुशासन का आह्वान
आर्थिकी पर नोबल प्राइज प्राप्त महाशय रिचर्ड थेअर नयी आर्थिकी समीक्षाकर्ता हैं। नोबल प्राइज निर्णायक समुच्चय ने महाशय रिचर्ड थेअर की आर्थिकी अवधारणा को वैश्विक महत्व दिया। महाशय थेअर ने जो आर्थिकी सिद्धांत निष्पादित किये हिन्द के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने नोटबन्दी का जो रास्ता अपनाया उसे महाशय थेअर ने सराहा पर हिन्द के दस वर्ष प्रधानमंत्री रहे डाक्टर मनमोहन सिंह सहित ज्यादातर हिन्दुस्तानी अर्थ विशेषज्ञ नोटबंदी के हिमायती नहीं हैं, लोक आह््वान करना चाहते हैं कि नोटबंदी सही आर्थिक निर्णय नहीं था पर हिन्द के वे लोग जो न तो अर्थशास्त्री हैं न ही राजनीतिज्ञ लेकिन उनका भरोसा नरेन्द्र दामोदरदास मोदी पर शत प्रतिशत है। वे लोग मानते हैं मोदी जो कुछ कर रहे हैं वह हिन्द के व्यापक हित में है। डाक्टर मनमोहन सिंह भी व्यक्तिगत रूप से ईमानदार व्यक्ति हैं पर नरेन्द्र दामोदरदास मोदी में जो सदाचारिता है, जो निस्वार्थ लोकसेवा का भाव है वह हिन्द की राजनीति को सीधे रास्ते में चलाने में सफल होगया है। उनकी सफलता मुल्क के एक अरब सैंतीस करोड़ लोगों का प्रधानमंत्री पर विश्वास होना है। अगर हम पिछले प्रधानमंत्री व वर्तमान प्रधानमंत्री की ईमानदारी, सच्चरित्रता तथा राजनीतिक एवं सामाजिक हित साधन की दृष्टि से देखें तो यह साफ नजर आता है। बेहद ईमानदार प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह ने दस वर्ष प्रतिनिधि प्रधानमंत्री का आचरण किया वे लोकतंत्र का चुनाव लड़ने की क्षमता अर्जित नहीं कर सके। उन्हें महाशया सोनिया गांधी के इशारों पर चलना अनिवार्य होगया। चूंकि डाक्टर साहब राजनीतिज्ञ नहीं टेक्नोक्रेट थे उनकी वैचारिक चूक ने लोकसभा चुनाव लड़ कर प्रधानमंत्री बनने की कामना जाहिर नहीं की। वे लोकसभा के नेता थे पर लोकसभा सदस्यता अर्जन पात्रता न कर पाने के कारण वे राजनीतिक हिम्मत करने से चूूक गये। उनकी यही वैचारिक दुर्बलता उनके उत्तराधिकारी महाशय नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के लिये राजनीतिक वरदान साबित हुई। 2014 के लोकसभा चुनावों में तीस वर्ष के पश्चात किसी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले तीन सालों में हिन्द का राजनीतिक सामाजिक तथा कूटनीतिक व आर्थिक रोडमैप का नया पैमाना खोज डाला, उनकी प्रत्युत्पन्न मति तथा उद्भट भाषण कला। वे डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पश्चात पहले हिन्दुस्तानी नेता हैं जिन्हें धाराप्रवाह हिन्दी भाषण कला का सरस्वती वरदान है। हिन्दी भाषियों में राजर्षि टण्डन, जयप्रकाश नारायण, डाक्टर राममनोहर लोहिया तथा हिन्द के दसवें प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी अद्वितीय हिन्दी भाषण कर्ता रहे। ये सभी व्यक्ति हिन्दी भाषी भी रहे जबकि डाक्टर मुखर्जी व वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी क्रमशः बंगला भाषा व गुजराती भाषी होने के बावजूद हिन्दी भाषण कला मर्मज्ञ रहे हैं। उन पर सरस्वती की अपार कृपा बनी हुई है, देश का जन जन नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के गीत गारहा है।
महाशया बिन्दु डालमिया का स्तंभ अनदर टर्म फार मोदी ? में टाइम्स आफ इंडिया के पहली नवंबर 2017 के द्वारा वही गीत गारही हैं जो महाशय कपिल सिब्बल, पी. चिदंबरम जोर जोर से गारहे हैं। ये दोनों कांग्रेसी होने के अलावा आला दर्जा वकील भी हैं। योगेश्वर वासुदेव श्रीकृष्ण ने अपने लंगोटिया यार उद्धव से कहा - सर्वम् न्याय्यम् युक्तिमत्वद् विदुषनं किं अशोभनम्। कानूनी युक्तियां अभिव्यक्त करने में संभवतः ये दोनोें महानुभाव उतनी वाग्विशेषता पात्रता अर्जित नहीं कर पाये हैं जितना महाशय रामजेठमलानी सुप्रीम कोर्ट में अपना मुकदमा जीतने में सफलता प्राप्त करते हैं। वाणी न्यायिक विशेषज्ञता के पारंगत महाशय रामजेठमलानी हैं पर हिन्द के प्रधानमंत्री स्वयं वकील नहीं हैं सरस्वती उनकी वाणी में वाग विशेषज्ञता की त्रिवेणी का संगम बनाती हैं। प्रधानमंत्री अंतर्दृष्टि तथा उनका पारवारिक स्वार्थ रहित होना सोने में सुहागे का काम कर रहा है। हिन्द के लोग राजा रामचन्द्र के रामराज्य और धर्मराज युधिष्ठिर के धर्मराज की गाथा का नित्यगान करते हैं। मध्यकालीन इतिहास में विक्रमादित्य, हर्षवर्धन तथा भृर्तहरि की गाथा यत्र तत्र गायी जाती रही है। थानेश्वर के राजा हर्ष जब महाकुंभ में प्रयाग आते अपना सब कुछ गरीबों को अर्पित करते। पहनने के कपड़े भी उन्हें उनकी भगिनी देतीं। राजा हर्ष की भगिनी का आदर्श कालांतर में स्वामी विवेकानंद की भगिनी निवेदिता जिसे पश्चिम के लोग सिस्टर निवेदिता के नाम से जानते हैं अलौकिक व्यक्तित्त्व की स्वामिनी थीं। दूर क्यों जायें हमारे अपने जमाने में मुजफ्फरपुर बिहार केे जाने माने वकील डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद के अत्यंत स्नेही मित्र बाबू ब्रजकिशोर की कन्या प्रभावती और बाबू जयप्रकाश नारायण का गृहस्थ वैसा ही महत्वशील था जैसा रामकृष्ण परमहंस और उनकी अर्धांगिनी का। अब बिन्दु डालमिया के स्तंभ में व्यक्त विचारों पर चर्चा करें। हिन्दुस्तान की आजादी के समय सेठ रामकृष्ण डालमिया बहुत बड़े उद्योगपति थे। उनके अनुज गौरहरि डालमिया अद्वितीय गौ सेवक थे। कनाट प्लेस में सिंधिया हाउस में रहते। इस ब्लागर को बुला कर विष्णु सहस्त्रनाम सुनते, गो सेवा और विष्णु सहस्त्रनाम उनके मुख्य विषय थे। उद्योगपति के अनुज होने के बावजूद वे एक साधारण व्यक्ति के तौर पर रहते। सड़क में चलने वाले हर बटोही की कुशलक्षेम लेते। युगांतर आगया, पिछले सत्तर वर्षों में लोकतंत्र के जरिये राजकाज करने वाले व्यक्तियों के दिलों में सत्ता की नशाखोरी ने कब्जा कर लिया। महात्मा गांधी की चाहत पीछे छूट गयी। हिन्द के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने महात्मा गांधी की आकांक्षा को अपने सदाचार से क्रियात्मक तौर पर चालू कर डाला।
जिस आर्थिक फिसलन का महाशया बिन्दु डालमिया उल्लेख कर रही हैं कह रही हैं कि एन.डी.ए. नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस उनकी राय में आर्थिकी में फिसल गया हैै। वे यह नहीं कह रही हैं कि हिन्द की एक अरब सैंतीस करोड़ जनता केे हाथों में रोजगार उनकी क्षमतानुसार काम करने की शक्ति केवल गांधी का चर्खा और कबीर का करघा ही दे सकता है। महात्मा गांधी ने सन 1915 में जो संकल्प लिया वह ठीक एक सौ वर्ष उपरांत भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का समर्थ राष्ट्र बनाने के मार्ग में सहायक बन रहा है। हिन्द के मैकोलाइट अंग्रेजीदां भद्रलोक तथा भद्र महिलायें गरीब हिन्दुस्तानियों के प्रति उपेक्षा भाव रखते हैं पर गांधी स्वामी विवेकानंद तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीब को दरिद्रनारायण के रूप में देखते थे। गरीब में दरिद्रनारायण का दर्शन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर चुके हैं। उन्होंने ठान लिया है कि स्मार्ट विलेज, स्मार्ट सिटी तथा स्मार्ट छावनी परिषदों के जरिये हर हिन्दुस्तानी गरीब को रोजगार दिये जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। बिन्दु डालमिया कहती हैं कांग्रेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है जो पूर्णतया श्रीमती सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी पर निर्भर है। थोड़ा बहुत सहारा इन मां बेटों को इंदिरा गांधी की पोती राजीव गांधी पुत्री प्रियंका अपनी दादी की जीवनशैली से देने का प्रयास कर रही हैं पर सोनिया गांधी महाशया बेटी के बजाय बेटे को ही महत्व देती हैं। जिनका जीवन तारतम्य हीन है उन्होंने 45 वर्ष तक विवाह नहीं किया अब कह रहे हैं तकदीर साथ देगी तो शादी भी हो जायेगी। बिन्दु डालमिया की नजर में कांग्रेस व भाजपा में प्राइवेट कंपनी व पब्लिक कंपनी वाला फर्क है। ऐसा प्रतीत होता है कि महाशया बिन्दु डालमिया की अपनी सहानुभूति महाशय राहुल गांधी के साथ है। हिमाचल व गुजरात में निर्वाचन में चुनाव प्रक्रिया में गहरी नजर रखने वाले विश्लेषक भाजपा की जीत सुनिश्चित मानते हैं। हिमाचल जहां अभी तक कांग्रेस के मुख्यमंत्री 83 वर्षीय राजा वीर भद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस पुनः हिमाचल में छा जाना चाहती है। गुजरात तो कांग्रेस के लिये हारा हुआ जुआ है। हार्दिक पटेल सहित गैर कांग्रेसी सहायकों पर कांग्रेस की नजर है। कहते हैं 125 विधायक कांग्रेस से विजयी होंगे पर यह मृग मरीचिका लगती हैै। एंटी इनकबैंसी के बावजूद पिछली दो दशाब्दियों में केवल एक वर्ष कम याने उन्नीस वर्षों से भाजपा गुजरात में सत्तानशीन है। कांग्रेस की कल्पना केवल ख्याली पुलाव मालूम पड़ती है। महाशय अहमद पटेल के अलावा महाशया सोनिया गांधी का अतिविश्वास पात्र नेतृत्व है ही नहीं। आआपा तथा पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह बघेला का मंत्री कहीं कांग्रेस के नेता विरोध पक्ष के दावे को भी छीन न डाले। कांग्रेस के वर्तमान नेताओं के सुझाव में महाशय शंकर सिंह बघेला गुजरात की राजनीतिक नाड़ी विशेषज्ञ हैं। बिन्दु डालमिया मोदी सरकार की लोकप्रियता का प्रसंग छेड़ रही हैं। भारत की जनता प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी पर यकीन करती है। अगर भाजपा पर जनता का यकीन होता तो लालकृष्ण आडवाणी नीत भाजपा पर लोक विश्वास नहीं था जबकि 2014 में नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने अपने सदाचार के बलबूते पर ‘न मे द्वेष्योस्ति न प्रियः’ मेरा कोई दुश्मन नहीं कोई अत्यधिक प्रेमी भी नहीं, सब अपने हैं सब समान हैं यह है मोदी गुरूमंत्र। अमरीकी आर्थिकी के पुरोधा महाशय रघुराम राजन को भी पी. चिदंबरम ने भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर नियुक्त किया। महाशय रघुराम को भारतीय रिजर्व बैंक की गवर्नरी प्रघानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल में बितानी पड़ी। वे सोचते थे कि हिन्द में मंदी का पुनरागमन हो सकता है। 1930 में जब मंदी ने अपने पैर फैलाये समूची दुनियां का एकला व्यक्तित्त्व महात्मा गांधी का था जिस पर मंदी का असर नहीं हुआ। महात्मा ने खादी के जरिये मंदी को सत्वहीन साबित कर डाला। 1930 से चल रही मंदी के दौरान महात्मा गांधी ने 1934 में चंदा इकट्ठा कर आचार्य जे.बी. कृपलानी को ईश्वरगंगी काशी पहुंच कर तीन लाख चालीस हजार रूपये की थैली खादी के काम के लिये सौंपते हुए कहा - प्रोफेसर यह हिन्द के कत्ती बुनकरों की अमानत है। अमानत में खयानत न हो यह आपको देखना है। आज उसी गांधी आश्रम के पास तीस अरब रूपये से ज्यादा मूल्य की भू भवन संपदा है। आचार्य कृपलानी द्वारा संचालित गांधी आश्रम पर प्रधानमंत्री जी को विशेष ध्यान इसलिये देना है कि कहीं गांधी आश्रम के मौजूदा कर्ताधर्ता तीस अरब रूपये मूल्य की भू भवन संपदा को बिल्डरों को सौंप कर गांधी आश्रम को पूर्णतया श्रीहीन न कर डालें इसलिये तात्कालिक जरूरत यह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाशय से अनुरोध किया जाये कि तीस अरब रूपये मूल्य की भू भवन संपदा को आदाता - रिसीवर मंडली नियुक्त कर खादी को पुनः सजीव बनाया जाये। गांधी आश्रम भू भवन संपदा कश्मीर, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल व मध्य प्रदेश में है। वैकुंठ ल. मेहता ने गांधी आश्रम को रोअड़ कताई के जरिये ओढ़न बिछावन के क्षेत्र में आर्थिक स्वतंत्रता दिलायी। एक बार उपयोग की हुई रूई को चाहे वह रजाई में हो, गद्दे में हो या तकिये में हो उसे पुनः कात कर सूत की बुनाई से खेस और दुतई निर्मित कर गांव के लोगों और शहर के लोगों को भी सस्ता ओढ़प बिछावन प्रबंधन कराया। रोअड़ कताई, हाथ बुनाई के काम से गांवों की महिलाओं व बुनकरों को जो स्थायी रोजगार मिल रहा था वह कहीं एमएसएमई की खादी ब्रांड नीति से समाप्त न हो जाये यह देखना गांवों व शहरों की कुटीर उद्यमिता के लिये नितांत आवश्यक है। बिन्दु डालमिया कहती हैं टी.आई.एन.ए. दिअर इज नो अल्टरनेटिव। मतदाताओं के सामने भारतीय जनता पार्टी को मत देने के अलावा कोई विकल्प नहीं यह मानते हुए भी वे कांग्रेस की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी वाली स्थिति केे बावजूद अपने मन में संकल्प कर रही हैं कि मोदी विरोधी भी अपने पैर जमायें। मानव इतिहास में क्रांतियां कभी कभी होती हैं। मानव जाति को राजा पृथुश्रवा ने नयापन दिया। खेतीबाड़ी पशुपालन आदि के लिये प्रेरित किया। धरती को लोकहित का केन्द्र बनाया। पृथुश्रवा के कारण ही यह धरती पृथ्वी कहलाती है। हिन्द की मौजूदा जरूरत नये नये दण्डकारण्य निर्मित करने के बजाय सुशासन, राजदण्ड का भय कम से कम करना, बातचीत से समस्याओं को सुलझाना, अकेले नहीं सामूहिक नेतृत्व की ओर अग्रशील होना यह सभी हिन्द को प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के द्वारा उपलब्ध होरहा है।
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