आर्थिकी चमत्कार का ऊँट
गुजरात विधानसभा में किस करवट बैठता है?
गुजरात विधानसभा में किस करवट बैठता है?
2019 के लोकसभा चुनावों के लिये आगरा बनाम अयोध्या शोधविज्ञान टाइम्स आफ इंडिया के स्तंभकार महाशय नलिन मेहता अगर गुजराती भाषी और वैष्णव वामन हों तो उन्हें अपने नाम की अंग्रेजी स्पेलिंग में मेहता के बजाय महता इंगित करना ज्यादा उपयोगी होता क्योेंकि गुजरात के वैष्णव ब्राह्मण जिनका सीधा साधा संबंध दशधा कृष्णभक्ति के प्रतीक नरसी मेहता (वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीर पराई जाणे रे) भजन के उद्गाता और डाकोर केे रणछोड़ जी महाराज के परम उपासक बेट द्वारका में वासुदेव देवकीनंदन श्रीकृष्ण को हुंडी भेजा करते तथा श्रीकृष्ण नरसी मेहता की हुंडी सकारते। गुजरात में श्रीकृष्ण द्वारा नरसी की हुंडी सकारना एक चमत्कारिक रहस्य बन गया। मंगलवार 24 अक्टूबर 2017 के टाइम्स आफ इंडिया के अंक में नलिन मेहता परमेनेंट वार बिट्वीन राइवल रिलीजन घोषित करते हुए कहते हैं - आगरा का ताजमहल हिन्द के इस्लाम धर्मावलंबियों का सहारा है। अखबार और उनके स्तंभकार अपनी बात कहने अथवा प्रस्तुत करने के मौलिक विशेषाधिकार का आधिकारिक विश्लेषण करने के लिये पूर्णतः विशेषाधिकार प्राप्त महानुभाव हैं। स्तंभकार का उत्तेजक पाठन तथा उत्तेजनावर्धक सोच में योगी आदित्यनाथ के मंतव्य के साथ भाजपा के राज्यसभा सांसद विनय कटियार व सरधना से भाजपा विधायक संगीत घोष केे उग्र वक्तव्यों का भी उल्लेख किया है। कटियार व सोम दोनों भाजपा के नीति निर्माता नहीं अथवा प्रधानमंत्री के आर्थिकी विकासवाद जिसे नलिन मेहता ‘प्लान ए’ और अयोध्या स्थित राममंदिर उपक्रम को ‘प्लान बी’ कह रहे हैं उससे भी संबंधित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हिन्द के संवैधानिक पद - प्रधानमंत्री व नीति रीति मर्यादाओं का संविधान की व्यवस्थाओं के अनुसार निर्धारण करने वाले नेतृत्व या हिन्द के संवैधानिक कर्णधार हैं। वे अभिव्यक्ति की आजादी का निरूपण केवल संविधान प्रावधानों के अंतर्गत संपन्न करने के उत्तरदायी हैं। प्रधानमंत्री जी का वैश्विक राजनीतिक लक्ष्य स्ट्रांग स्टेट है जबकि ज्यादातर अंग्रेजी अखबार नवीस हिन्द को सौफ्ट स्टेट देखना पसंद करते हैैं जबकि महाशय नलिन मेहता व अंग्रेजी भाषा का भारत में सबसे उम्रदार अखबार टाइम्स इंडिया पर कोई संवैधानिक पाबंदी नहीं है जो उन्हें जंचे अपने अखबार केे जरिये अंग्रेजी अखबार पढ़ने वाले व्यक्तियों को परोस सकते हैं यही काम नलिन मेहता संपन्न कर रहे हैं। उन्होंने आगरा बनाम अयोध्या का मसला 2017 के लोकसभा चुनावों के संदर्भ में उछाला। इस्लामी सल्तनत ने हिन्द में सबसे पहले सिंध में अपना डेरा बनाया वहां अरब से आये अरबी मुसलमानों का राजतंत्र शुरू हुआ पर हिन्द के ज्यादा हिस्सों पर फारस व फारसी भाषायी प्रभुत्व ज्यादा कामयाब रहा। मुगलों की आमद तो सोलहवीं शताब्दी में कारगर हुई जब बाबर ने हिन्द को जीता। मुगलों से पहले जो इस्लामी सल्तनत सिंध के अलावा शेष हिन्दुस्तान में कारगर रही उसका कालखंड लगभग एक हजार वर्ष माना जा सकता है। अगर इस्लामी सल्तनत ने ईरान, इराक, तुर्किस्तान, अफगानिस्तान की तरह समूचे हिन्दुस्तान को मुसलमान बना लिया होता नलिन मेहता जो कह रहे हैं - परमेनेंट वार बिट्वीन राइवल रिलीजन्स का नजारा हिन्द में नहीं दीखता। कोई भी राजनीतिक थिंकटैंक यह विचार करना ही नहीं चाहता कि वे कौन से कारण हैं जिनकी वजह से इस्लाम धर्म पूरे हिन्दुस्तान को मुसलमान नहीं बना पाया बजाय इसके इस्लाम के हिन्दुस्तान में प्रवेश के हिन्द में सूफी मत का विकास हुआ। आज हिन्द में सहारनपुर के देवबंद तथा अहिच्छत्र बरेली दो ऐसे स्थान हैं जहां इस्लामी धर्मचेतना के दो महत्वपूर्ण केन्द्र जिन्हें देवबंदी और बरेलवी संज्ञा दी जाती है। ये दो मजहबी इस्लामी चिंतन पोेखर के व्याख्याता हैं। हिन्द में इस्लाम केे आगमन को हमें अवधी के सूफी कवि मलिक मोहम्मद जायसी केे काव्य पद्मावत से सीख लेेेनी ही चाहिये।
मलिक मोहम्मद जायसी कहते हैं -
मलिक मोहम्मद जायसी कहते हैं -
विधना के मारग हैं तेते सरग नखत तन रोआं जेते।
जायसी ने और भी कहा -
जायस नगर धरम अस्थानू तहां जाय कवि कीन बखानू।
इस्लाम के हिन्द में पहुंचने पर अरब की मौलिक इस्लामियत ने हिन्द के मुसलमानों को चोखा मुसलमान मानने के बजाय ‘हिन्दू’ संज्ञा दी।
जब कोई अखबार या अखबार का नुमाइन्दा किसी राजनीतिक समूह को संदेह के नजरिये से देखता है तब वैसे ही हालात बनते हैं जिनका उल्लेख महाशय नलिन मेहता कर रहे हैं। हिन्दुस्तान अरब, ईरान, इराक, अफगानिस्तान, तुर्किस्तान आदि मुस्लिम राष्ट्रों की तरह मुसलमानी देश नहीं है। हिन्द का बटवारा करने वाले मोहम्मद अली जिन्ना जो स्वयं शिया मुसलमान थे गुजराती भाषी थे उन्होंने एक नया नारा उछाला - हिन्द का मुसलमान वामन बनिया की चाकरी करने के बजाय हिन्द के मुसलमानों के लिये अलग इस्लामी देश का निर्माण करेगा। पाकिस्तान व बंगला देश की मुसलमान आबादी के मुकाबले दुनियां में इंडोनेशिया व हिन्दुस्तान दो ऐसे मुल्क हैं जहां मुसलमान जनसंख्या बंगला देश व पाकिस्तान से ज्यादा है।
आगरा में ताजमहल व अकबर के किले के अलावा राधास्वामी संप्रदाय का महत्वपूर्ण केन्द्र है। राधास्वामी संप्रदाय हिन्द की कृष्ण भक्ति का उत्प्रेरक है। दूसरी ओर अयोध्या में मीरबाकी द्वारा निर्मित बाबरी मस्जिद जिसे 1992 में ढहा दिया गया था मुकदमा सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने जो फैसला दिया उसे सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार का बिन्दु घोषित करते हुए जिन लोगों के खिलाफ बाबरी मस्जिद गिराने केे आरोपियों को देश के वर्तमान कानून के तहत दंडित कर डाला तो मुल्क के सामने एक भीषण सामाजिक अव्यवस्था का नजारा आ सकता है। देश में एक अरब सैंतीस करोड़ लोग बसते हैं जिनमें अठारह करोड़ मुसलमान भी हैं। हिन्दू जनसंख्या 80 प्रतिशत से कुछ ज्यादा आंकी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि प्रकरण में जमीन की मालकियत याने जितनी जमीन जिस पक्ष की पर फैसला भी देना हैै यदि फैसला बाबरी मस्जिद के पक्ष में गया तो मुल्क में क्या स्थिति होगी, विचारणीय है ? सुप्रीम कोर्ट के नदी जल विवाद में तमिलनाडु व कर्नाटक अपने अपने धड़े के जल अधिकार पर अड़े हैं। उत्तर में पंजाब व हरयाणा में जल विवाद उग्रतर होता जारहा है जिसे संबंधित राज्य सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने के लिये तैयार नहीं हैं। जल प्रकरण में तो केवल चार राज्य आपस में फैसला करने के बजाय अपने अपने बिन्दु पर अड़े हैं। बाबरी मस्जिद मामला तो सारे हिन्दुस्तान से जुड़ा हुआ मसला है इसलिये न्याय प्रक्रियाजनित स्थितियों से निबटने में केवल विवेकशील नेतृत्व ही मुल्क को मजहबी संघर्ष से बचाने की क्षमता रखता है। ये सारे प्रकरण प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के संज्ञान में हैं, वे विकासवाद का झंडा ऊँचा कर चल रहे हैं। अंततोगत्वा उन्हें अपने मिशन में सफलता मिलने वाली है। उग्र सोच के लोग वे चाहे भाजपा में हों अथवा नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री के प्रत्यक्ष वा परोक्ष विरोधियों के समुच्चय में, प्रधानमंत्री उन सभी से निबटने की क्षमता अपने सदाचारी वैयक्तिक आचरण से साबित कर चुके हैं। प्रधानमंत्री की तरह उ.प्र. के युवा मुख्यमंत्री भी मुल्क के इतर राजनीतिज्ञों से अलग पंगत में खड़े हैं। सवाल हिन्दू मुसलमान का नहीं मनुष्यता व मनुष्य की विवेकशीलता का है। स्तंभकार महाशय नलिन मेहता को खोजखबर की गहराई में पहुंचने के बाद भी प्रधानमंत्री के विकासवाद सबका साथ सबका विकास गुरूमंत्र तथा योगी आदित्यनाथ की कल्पना का उ.प्र. आगरा, अयोध्या के अनुकूल अथवा प्रतिकूल परिस्थितियों मुकाबला करने में समर्थ हैं। 2019 के लोकसभा निर्वाचन में दृढ़निश्चयी नेतृत्व तथा दूरदर्शी राजनीतिक शिवसंकल्प कर्त्ता नरेन्द्र दामोदरदास मोदी अपने विरोधियों को पश्तहिम्मत करने की क्षमता रखते हैं। गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लोग मृगमरीचिका में फंसे हैं। कहते हैं हम 125 विधायकों को कांग्रेस के बलबूते पर विजयी बन कर गांधीनगर के विधानमंडल में शंखनाद करेंगे। संदेहास्पद प्रतीत होता है कि क्या गुजराज का हिन्दू जनमानस श्रीमती सोनिया गांधी समर्थित मुख्यमंत्री के उम्मीदवार अहमद पटेल महाशय को सत्तासीन करायेगा ? या धूल चटायेगा ? स्तंभकार मेहता का आगरा बनाम अयोध्या आगरा व अयोध्या दोनों आर्थिकी विकास की कालिन्दी व सरयू जल से महाभिषेक संपन्न करेंगे। गुजरात में कांग्रेस सत्ता के सपने देख रही है कहीं उसका नेता विरोध पक्ष वाला हक भी छिन न जाये। शंकर सिंह बघेला का मंच कांग्रेस को न घर का न घाट का बना कर नचा डाले। अनुभवी क्षत्रप नेता शंकर सिंह बघेला जयपुर की हिन्दुस्तान कांग्रेस के चुनाव चिह्न ट्रेक्टर पर विधानसभा के सभी 182 निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतार रहे हैं, विश्वास लबालब। जहां तक अयोध्या में राममंदिर बनाम बाबरी मस्जिद का भूमि स्वामित्व विवाद का निपटारा पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर ने विवाद के निपटाने के लिये जो तरीके सुझाये उन पर विचार करने एवं सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा मध्यम मार्ग का आश्रय लेने बाबत सोच सकते हैं ताकि अनहोनी से बचा जा सके और परमेंनेंट वार अभंग राइवल रिलीजंस को धार्मिक या मजहबी सौमनस्य से रोका जा सके। स्वातंत्र्योत्तर पिछले सत्तर वर्षों तथा संविधान लागू होने के पश्चात पिछले सतसठ वर्षों में दुनियां के ज्यादा राष्ट्र हिन्द को साफ्ट स्टेट रहने देने में ज्यादातर राजनीतिज्ञों का सियासी लाभ निहित था जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने इंडिया दैट इज भारत के मस्तक से साफ्ट स्टेट वाला बिल्ला हटा कर स्ट्रांग स्टेट इंडिया दैट इज भारत निर्मित कर डाला है। साफ्ट स्टेट के हामियों को हिन्द में बगल झांकनी पड़ रही है। लोकतंत्र को जिसे डेमोक्रेसी कहते हैं उसे परिवार तंत्र तथा वंश तंत्र की चुनौती को प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने आर्थिकी विकासवाद सबका साथ सबका विकास के गुरूमंत्र से उन राजनीतिज्ञों को निश्चेष्ट कर डाला है जो हिन्द को अपनी परिवारी रियासत मान कर चल रहे थे। समर्थ स्ट्रांग स्टेट - स्मार्ट विलेज, स्मार्ट सिटी तथा स्मार्ट छावनी परिषदों के जरिये हिन्द को दुनियां का सरताज बनाने केे अपने लक्ष्य को आने वाले दस वर्षों में उपलब्ध करना सुनिश्चित कर लिया है।
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