भारत के अद्भुत स्ट्रांग स्टेट वर्तमान नेतृत्व नरेंद्र मोदी का आह्वान
न दैन्यम् न पलायनम्
टाइम्स आफ इंडिया की अखबारी स्तंभकार महाशया सागरिका घोष ने अखबार के बुधवार 8 नवंबर 2017 के विचारों के सागर में नया भूचाल कर डाला। वे अपने स्तंभ में हिन्द केेे नागरिकों को कह रही हैं कि आप सभी दोषी हो। आपकी विवेक बुद्धि दोषपूर्ण होगयी है। टाइम्स आफ इंडिया हिन्द का सबसे पुराना अंग्रेजी अखबार है जिसने बर्तानी राज की जड़ें मजबूत करनेे में 1898 से अब तक सतत सक्रियता बरती है। आगामी इक्कीस वर्ष पश्चात यह अखबार हिन्द में अपनी हाजिरी पूरे 200 वर्ष संपन्न कर लेगा। हिन्द के सबसे पुराने अखबार टाइम्स आफ इंडिया को हिन्द के उद्योगपति दिवंगत महाशय रामकृष्ण डालमिया ने खरीद डाला। अपनी प्यारी कन्या रमा डालमिया जिनका विवाह बिजनौर जिले के नजीबाबाद कस्बे के मशहूर जैन परिवारी श्रेयांस प्रसाद जैन को सौंप डाला। श्रेयांस प्रसाद रमा दम्पत्ति ने टाइम्स आफ इंडिया का हिन्दुस्तानीकरण कर डाला। शायद इस महत्वपूर्ण घटना से सागरिका घोष अवगत हो इस अखबार को महाशय गिरिलाल जैन व दिवंगत खुशवंत सिंह ने अखबारी ऊँचाईयों तक पहुंचाया। इन दोनोेें संपादकों की विशेषता यह थी कि ये अपने विरोधी विचार को भी महत्व देते थे और विवेचनात्मक आलोचना के साथ साथ विरोधी विचार के महत्वपूर्ण अंशों की महत्ता को उचित स्थान देनेे में कतराते नहीं थे। ऐसे अखबार की स्तंभकार महाशया सागरिका घोष अपनी नजर में वर्तमान सरकार द्वारा अपने नागरिकों पर यकीन न करने का भयावह आरोप जड़ रही है। उनकी दृष्टि में हिन्द के नागरिक मौजूदा सरकार के रवैये के मुताबिक विवेक दोष बुद्धि से घिर गये हैं। उनकी नजर में यदि कोई सरकार अपने नागरिकों पर यकीन नहीं करती तो सुशासन असंभव हो जाता हैै। उन्होंने एन.डी.ए. सरकार पर आरोप जड़ा है कि मौजूदा सरकार हिन्द केे नागरिकों पर घोर अविश्वास कर रही है। उनके दस सूत्री स्तंभ का मननपूर्वक अध्ययन करने से प्रतीत होता है कि वे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अर्थतंत्र के विशेषज्ञ डाक्टर मनमोहन सिंह को उद्धृत करते हुए लिखती हैं - डाक्टर मनमोहन सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को चोर समझने की अवधारणा से लोकतांत्रिक विचार पार्थ्यक्य के महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी होरही है। महाशया सागरिका घोष अपनी अवधारणा व्यक्त करने की स्वत्वाधिकारी हैं। टाइम्स आफ इंडिया अखबार ने उन्हें नोटबंदी के खिलाफ अपने विचार व्यक्त करने की पूरी आजादी दे रखी है। महाशया सागरिका घोष का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को लोकतांत्रिकता के आवरण में डिक्टेटरनुमा लोकनेता साबित करने का उनके द्वारा किया गया हरसंभव प्रयास लगता है। उन्हें यह भलीभांति पता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हिन्द केे आम नागरिकों की पहली पसंद हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह कांग्रेसाध्यक्ष्य महाशया सोनिया गांधी के प्रतिनिधि केे तौर पर दस वर्ष हिन्द केे प्रधानमंत्री रहे। जिन आर्थिक सुधारों को डाक्टर मनमोहन सिंह ने 1991 में दिवंगत लोकनेता पी.वी. नरसिंह राव केे प्रधानमंत्रित्व में उनके वित्तमंत्री की हैसियत से शुरू किया उन सुधारों को 1993 से 2004 तक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी संबल दिया। 2004 में सोनिया गांधी की कांग्रेस को भाजपा के मुकाबले काफी बढ़त मिल गयी। महाशय सोनिया गांधी ने डाक्टर मनमोहन सिंह को लोकसभा का चुनाव न लड़ा कर असम से राज्यसभा सदस्य के नाते प्रतिनिधि प्रधानमंत्री के तौर पर प्रतिष्ठित किया। मनमोहन सिंह राजनेता नहीं टेक्नोक्रेट थे जबकि मौजूदा प्रधानमंत्री पूर्णतः सियासत की गहराइयों के मर्मज्ञ राजनीतिज्ञ हैं। उनकी वाणी में शब्द कौशल है। डाक्टर मनमोहन सिंह को कांग्रेस अध्यक्षा महाशया सोनिया गांधी मोहिं क्या संदेश देरही हैं यह देखना पड़ता था। अगर डाक्टर साहब से मन की बात पूछी जाये तो इन्कार नहीं कर सकेंगे कि नोटबंदी ने हिन्द की आर्थिक तस्वीर बदल डाली पर डाक्टर साहब को तो वह कहना है जिसे महाशया सोनिया गांधी उनसे कहलाना चाहती हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने भाजपा सांसदों को मशविरा दिया कि वे अपने मन की बात और चाहत की बात पार्टी में व्यापक लोकतंत्र के हित में खुल कर व्यक्त करें। दूसरी ओर जिन राजनीतिक परिस्थितियों में सागरिका घोष नागरिकों पर अविश्वास की बात कह रही हैं, विवेक दोष बुद्धि को उजागर कर रही हैं, जी.एस.टी. के बारे में भी उन्हें चिंता सता रही है उन्हें सर्वत्र दोष बुद्धि ही दिखायी देरही हैै। वे अपने मूल उद्देश्य पर टिक कर कह रही हैं गत वर्ष 8 नवंबर 2016 के दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने पांच सौ व हजार रूपये के नोट चलन से बाहर कर डाले। यही सागरिका घोष की मुख्य गाथा है। उनकी नजर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने उन हिन्दवासियों को जिन्होंने पांच सौ व हजार रूपये केे नोट अपनी अन्टी में दबाये रखे और उसे काला धन बताया यह आरोप लगा रही हैं महाशया सागरिका घोष। उन्हें मौजूदा सरकार का हर कदम नागरिकों को दोषी घोषित करने में व्यस्त है। महाशया सागरिका घोष भूल रही हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की सरकार बहुमत वाली सरकार है लोकतांत्रिक सरकार है पर उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की लोकतांत्रिकता में डिक्टेटरशिप नजर आती है। अगर टाइम्स आफ इंडिया के दूरदर्शी संपादकों गिरलाल जैन व खुशवंत सिंह के जमाने में महाशया सागरिका घोष सरीखा स्वयं छपता वे दोनों संपादक वास्तविकता की अनदेखी नहीं करते और सच्चाई को भी सामने लाते।
एक और महत्वपूर्ण सवाल महाशया सागरिका घोष ने उछाला है क्या वास्तव में वर्तमान सरकार अपने नागरिकों पर नायकीनी करती है ? प्रधानमंत्री जी को इस आरोप का जवाब देना ही चाहिये। कांग्रेस व दूसरे विपक्षी दल नोटबंदी को मुल्क के लिये नुकसानदेह बता रहे हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का कहना है - 1985 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी ने कहा था - दिल्ली से यदि एक रूपया गांव की तरफ जाता है तो गांव में केवल पंद्रह पैसे ही पहुंचते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री की इस स्वीकारोक्ति को मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने नोटबंदी के बाद कहा - जो एक रूपया दिल्ली से गांव तक पहुंचने में पिचासी पैसा पंजे में ही अटक जाता था वही रूपया अब पूरे 100 पैसे के रूप में गांव तक पहुंचाने का यज्ञ ही नोटबंदी है। इसी तरह महाशया सागरिका घोष आधार कार्ड पर भी हमला कर रही हैं इसे व्यक्ति की निजता अथवा प्राइवेसी पर हमला बता रही हैं तो आधार कार्ड वाली योजना तो महाशया सागरिका घोष के चहेते कांग्रेस शासन में ही शुरू हुई थी। मौजूदा सरकार तो पूर्ववर्ती सरकार की योजना को ही केवल ढो रही है उसके लाभ जन जन को मिलें इस ओर अग्रसर है। आधार कार्ड के खिलाफ पश्चिम बंग की मुख्यमंत्री महाशया ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है किन्तु इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंग सरकार को सलाह दी है कि राज्य सरकार का यह कदम उपयुक्त नहीं याने व्यक्तिगत रूप से ममता बनर्जी अपनी निजता या प्राइवेसी संरक्षा के लिये अदालत में अपना पक्ष प्रस्तुत करें और वे व्यक्तिगत तौर पर ऐसा कर सकती हैं पर राज्य सरकार की तरफ से केन्द्र सरकार के किसी भी कानून के खिलाफ ऐसा कोई भी अभियान नहीं चलाया जा सकता जिनसे केन्द्र सरकार के द्वारा जनहित में बनाये गये कानूनी आदेशों की अवहेलना होती हो।
महाशया सागरिका घोष के दसों बिन्दुओं वाले स्तंभ का लब्बोलुआब यह है कि मौजूदा सरकार हिन्दुत्व को बढ़ावा देरही है पर प्रधानमंत्री का आह्वान ‘सबका साथ सबका विकास’ संवैधानिक रास्ता है। प्रधानमंत्री की हैसियत से प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने हिन्दुत्व को नहीं हिन्दत्व को बढ़ावा दिया हैै। सागरिका घोष ने जो आरोप प्रधानमंत्री पर जड़े हैं वे ज्यादातर काल्पनिक हैं। हिन्द में आज जितनी राजनीतिक पार्टियां हैं उन सब में नेतृत्व का निर्वैर होना, सबको उनका सम्मान देना यह कला केवल वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी में ही उपलब्ध है। महाशया सागरिका घोष ने जो ज्यादतियां आरोप जड़ने में की हैं उनमें वे कहती हैं - रेजिमेंटेड इंडियन इज अनसक्सेसफुल इंडियन, इट इज दि वी इंडियन हू इज दि सोरिंग थिंकर स्पार्किंग इनोवेटर बिजनेस बिल्डर एंड हाई एचीवर। सवाल है कि रेजिमेंटेड इंडियन कौन है ? लंगरनुमा समूह ? क्या सागरिका घोष राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को लंगरनुमा समुच्चय घोषित करना चाहती हैं ? राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डाक्टर बलिराम केशव हेडगेवार व्यवसाय से ऐलोपैथी के डाक्टर थे तथा हिन्द की स्वतंत्रता के प्रबल पक्षधर भी। उन्होंने जोे संगठन खड़ा किया वह लंगरवादी नहीं है इसलिये महाशया सागरिका घोष को अपने आरोपोें का स्वयं पुनर्वाचन कर जो अहैतुक ज्यादती उन्होंने आरोप मढ़ते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी पर की उनसे अनजाने में जो चूक हुई है उसे उन्हें सुधार लेना चाहिये। डाक्टर मनमोहन सिंह पूर्व प्रधानमंत्री सहित जिन व्यक्तियों को महाशया सागरिका घोष दूध का धुला पवित्रतम व्यक्तित्त्व मान कर मौजूदा प्रधानमंत्री की खिलाफ अनर्गल बयानबाजी कर रही हैं इस संबंध में अखबार के संपादक महाशय अथवा महाशया को भी सागरिका घोष के बेतुके आरोपों के पुलिन्दे को एक बार फिर से पढ़ना चाहिये। यदि उन्हें लगे कि सागरिका घोष ने जाने अनजाने घोर आपत्तिजनक बिन्दु अपने स्तंभ में समायोजित किये हैं तो अखबार का यह कर्त्तव्य बनता है कि उन्हें उनकी त्रुटियों का आभास कराया जाये और वे उसे स्वीकारें। नवंबर 2017 में हिमाचल तथा दिसंबर 2017 में गुजरात में होने वाले चुनावोें के नतीजे और आगामी वर्ष जिन जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं उनके नतीजे 2019 के लोकसभा चुनाव की पूर्वाभासी भूमिका साबित होंगे। जहां तक संविधान के प्रावधानों का सवाल है संवैधानिक स्थितियों का विहंगमावलोकन करने के उपरांत ही प्रधानमंत्री ने सबका साथ सबका विकास का गुरू बीजमंत्र अपनाया है। महाशय सागरिका घोष ने इसी बीजमंत्र की अनदेखी कर अपने मन के उद्गार व्यक्त कर दिये हैं। बहुत देर नहीं हुई जब नरेन्द्र दामोदरदास मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार कलिग्नार एम. करूणानिधि का स्वास्थ्य हालचाल जानने उनके निवास स्थान पर पहुंचे। दोनों जब मुख्यमंत्री थे उनकी पारस्परिक चर्चा होती रहती। दोनों समृद्ध राज्यों के मुख्यमंत्री थे तथा दोनों ही अपने अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले किन्तु व्यावहारिकता के कुशल व्यक्तित्त्व भी रहे हैं। प्रधानमंत्री ने एम. करूणानिधि का हालचाल उनके निवास स्थान पर स्वयं जाकर जाना तथा उनके शीघ्र स्वस्थ्य होने की मंगलकामना भी की। प्रधानमंत्री मोदी जी का स्वागत डी.एम.के. के कार्यकारी अध्यक्ष एम.के. स्टाालिन नेता विरोधी दल तमिलनाडु असेंबली ने स्वयं जाकर किया।
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